Sunday, 7 February 2016

Jeevan Sathi

जीवनसाथी

उन दोनों की मुलाकात एक विवाह समारोह के दौरान ही हुई थी ।प्रथम दृष्टि में ही दोनों ने मन ही मन एक दूसरे को पसंद कर लिया था ।

मनु अपने किसी रिश्तेदार की बारात में आया था जहां उसकी नजरें विभा से टकरा गयी । विभा का मुस्कुराता चेहरा उसके मन में बस गया था । विभा ने भी जब मनु को देखा तो उसके भी दिल की धड़कनें बढ़ गयी थी ।

विवाह के दौरान होने वाली कई रस्मों में उन दोनों का बार बार आमना सामना भी हुआ, दोनों ने मुस्कुरा कर आँखों ही आँखों में जैसे प्रेम का इजहार कर दिया था ।

दोनों की उम्र विवाह योग्य ही थी । और दोनों के परिवार वाले योग्य वर वधु की तलाश में थे । शायद ईश्वर ने भी उनके प्रेम को स्वीकृति दे दी थी । तभी तो संयोग से विभा के पिता ने मनु के लिए उसके पिताजी के सामने बात चलाई और बताया कि मेरी लड़की विभा के लिए मुझे आपका लड़का पसंद है, और मेरे घर पर भी सबको मनु पसंद है । अब अगर आप स्वीकृति दें तो बात को आगे बढ़ाया जाए ।

मनु के पिता ने भी कहा कि इससे अच्छी बात हमारे लिए क्या होगी कि बिना किसी भाग दौड़ के लड़के का रिश्ता हो जाए, और वो भी आपके साथ । मुझे कोई आपत्ति नहीं है, हां मैं एक बार अपनी पत्नी और मनु से विचार विमर्श करके फिर आपको जवाब दुंगा ।

अगले दिन ही निर्णय आ गया । मनु के पिताजी तो आश्चर्य चकित हो गए जा बड़ी बहु ने बताया की पिताजी, हमें तो लड़की पहले से ही पसंद है ।

मनु और विभा को तो जैसे बिन मांगे ही मनवांछित फल मिल गया था । निश्चित समय पर सगाई की रस्म हो गयी, उस दिन मनु ने विभा को अपने मन की बात बताई ।

"विभा, मुझे तुम पहली नजर में ही पसंद आ गयी थी, आज तुम्हें एक राज की बात बताता हुं । दरअसल बारात जाने से पहले भाभी ने मुझे तुम्हारे बारे में बता दिया था और कहा था कि वहां विभा नाम की लड़की होगी उसे देख लेना । जचे तो बात आगे बढ़ाएंगे ।" मनु ने हंसते हुए कहा तो विभा ने भी थोड़ा लजाते हुए जवाब दिया।

"आपको क्या लगता है, भाभी सिर्फ आपके ही है । मेरे भी दो भाभियां है और मुझे भी आप पहली ही नजर में.... " कहते कहते वो और लजा गई ।




उसी दिन विवाह की तिथि और समय तय हो गया और तय समयानुसार दोनों का विवाह हो गया । हंसी ख़ुशी दोनों अपना जीवन बिताने लगे । दिनोदिन दोनों का प्रेम और गहरा होता गया । संयोग से दोनों का स्वभाव अच्छा था और विचार भी आपस में काफी मिलते थे तो कहीं मनमुटाव की कोई संभावना ही नहीं थी ।

विवाह को हंसी ख़ुशी दो वर्ष बीत चुके थे । एक दिन मनु की माँ ने हँसते हुए विभा से कहा बेटा अब कोई नन्हा मुन्ना दे दो, बहुत समय हो गया आँगन में कोई नन्ही किलकारी गूंजे हुए । विभा शरमा गई और रसोई के कामों में लग गई ।

परंतु सास की इस बात ने उसको थोड़ा चिंता में डाल दिया था । दो वर्षो में अभी तक कभी भी उसे इस बात का खयाल भी नहीं आया था कि एक नारी का पूर्णत्व माँ बनने में ही है । और बीते दो वर्षों में ना जाने क्यूं इसकी कोई संभावना भी नहीं बनी थी ।

शाम को जब मनु काम से घर आया तो विभा ने उसे अपनी चिंता से अवगत कराया ।

मनु ने उसे ढाढ़स देते हुए कहा कि "अरे विभा इसमें परेशान होने वाली क्या बात है, अभी गर्भधारण नहीं हुआ तो चिंतित क्यों हो रही हो, फिर भी यदि तुम्हें इतनी चिंता हो रही है तो चलो कल हम डॉक्टर से मिल लेते हैं ।"

अगले दिन डॉक्टर ने जब जांच रिपोर्ट दी तो विभा तो सकते में आ गई । महिला डॉक्टर ने बताया कि रिपोर्ट में था की विभा की शारीरिक संरचना में कुछ ऐसा विकार है, जो उसके गर्भाधान में बाधा बन रहा है । जिसकी कोई खास दवा तो नहीं है फिर भी ये कुछ दवाएं लिखी है, लेते रहना । ईश्वर ने चाहा तो सब ठीक हो जायेगा । और हां ये विकार समय के साथ अपने आप भी ठीक हो सकता है इसलिए ईश्वर पे भरोसा रखें ।

विभा टूट सी गई । उसे अपना वैवाहिक सम्बन्ध संकट में नजर आने लगा । हस्पताल से बाहर आते समय वो उदास सी थी । मनु दवा की दुकान से दवा लेकर आया तो लगभग रो पड़ने वाली हालत में विभा को देखकर उसके कंधे पर हाथ रख कर बोला ।

"विभा, मैं जानता हुं तुम क्या सोच रही हो । लेकिन जो तुम सोच रही हो उसे अपने जेहन से निकाल दो । मेरा प्रेम इतना कमजोर नहीं है कि इतनी सी बात के लिए कम हो जाए या टूट जाये । जिस तरह तुम्हे मेरी जरुरत है उससे कहीं ज्यादा मुझे तुम्हारी जरुरत है । हम जीवनसाथी है, सारे जीवन के इक दूजे के साथी । बच्चे तो जीवन में आएंगे तब आएंगे, तुम तो मेरे जीवन में आ चुकी हो और इसका एक अहम् हिस्सा बन चुकी है ।" फिर हंसकर कहा "मेरा तुम्हारा साथ सात जन्मों का है पगली, ये तो अभी पहला ही है ।"

विभा की आँखों से झर झरआंसू बहने लगे और वो मनु के कंधे पर सर रखकर फफककर रो उठी । मनु ने उसे धीरज बंधाया और घर ले आया ।

कुछ दिनों बाद सब कुछ वापस सामान्य हो गया । विभा के दिल में मनु और बाकि परिवार के लिए मान और बढ़ गया था । सबने उसे ढाढ़स जो बंधाया था । सासु माँ ने तो यहां तक कहा बेटा क्यूं फिकर करती है, डॉक्टर ने कहा है ना ईश्वर सब ठीक कर देगा तो वो जरूर ठीक कर देगा । भरोसा रखो और वैसे भी अभी तो तुम्हारी उम्र ही क्या है । चिंता मत करो और मेरे लिए एक अदरक वाली चाय बना लाओ । सास ने मुस्कराहट के साथ उसके सर पर हाथ फिरा कर कहा था ।

देखते देखते और चार साल गुजर गए । एक दिन अचानक विभा को काम करते करते चक्कर सा आया । संयोग से उस वक्त मनु उसके पास ही खड़ा था, इससे पहले की वो चक्कर खा कर गिरती, मनु ने उसे थाम लिया और तुरंत अस्पताल ले के भागा ।

अस्पताल में डॉक्टर ने विभा का मुआयना किया और उस वक्त कमरे के बाहर बैठे मनु की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा जब डॉक्टर बाहर आकर मुस्कुराते हुए मनु से बोली "मुबारक हो, आप पिता बनने वाले हैं।"


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****शिव शर्मा की कलम से****




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