Thursday, 30 June 2016

Bhula Na Paoge

भुला ना पाओगे


अंदाज मुहब्बत का कुछ इस कदर रखता हुं
अपने चाहने वालों के दिलों में घर रखता हुं,


जो भी मिलता है अपना बना लेता है मुझे,
बस मुस्कुरा के बात करने का हुनर रखता हुं,

मशरूफ हो कर तुम कहीं भूल ना जाओ मुझे
नादां हुं, बेवजह ही दिल में ये डर रखता हुं,

खुदा मेरे अपनों की हर दुआ क़ुबूल कर लेना
यही तमन्ना ले तेरे सजदे में सर रखता हुं,

डरता हुं कभी मुझसे कोई चुरा ना ले कहीं
इसीलिए तुम्हें अपने दिल में छुपाकर रखता हुं,



बरक़रार रहे तुम्हारी जिंदगी की राहों में उजाले
रौशनी के लिए अपना जिगर जलाकर रखता हुं,

यकीं है कि तुम खुद का ख़याल रखते हो
फिक्र जरुरी तो नहीं, मगर रखता हुं,

चाहकर भी तुम कभी मुझे भुला ना पाओगे "शिव"
अपनी चाहत में इबादत सा असर रखता हुं ।।

            * * *

नमस्कार मित्रों । कल फिर मिलते हैं, एक नयी भावुक कहानी लेकर । तब तक के लिए अलविदा ।

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जय हिन्द

***शिव शर्मा की कलम से***









आपको मेरी ये रचना कैसी लगी दोस्तों । मैं आपको भी आमंत्रित करता हुं कि अगर आपके पास भी कोई आपकी अपनी स्वरचित कहानी, कविता, ग़ज़ल या निजी अनुभवों पर आधारित रचनायें हो तो हमें भेजें । हम उसे हमारे इस पेज पर सहर्ष प्रकाशित करेंगे ।.  Email : onlineprds@gmail.com

धन्यवाद

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Saturday, 25 June 2016

Kalpanaayen

कल्पनायें - Imaginations / Thoughts


नमस्कार दोस्तों । सर्वप्रथम तो आप सभी को मॉनसून आगमन की बधाई । ईश्वर करे इस बार की बरसात हर चेहरे पर मुस्कराहट खिला दे । ना कहीं सुखा पड़े और ना कहीं बाढ़ हो ।

Imaginations / thoughts

प्रार्थना कीजिये कि बादल इस कदर मेहरबान हो जाए कि हर खेत लहलहा उठे । हर जलाशय, जहाँ से गांव शहरों को पानी की आपूर्ति होती हो, अपनी तय सीमा तक लबालब भर जाए । तो फिर जरा कल्पना कीजिये कि आने वाले दिन कितने सुहाने होंगे । ना पानी का संकट होगा ना खाने की वस्तुओं की कमी । महंगाई भी काबू में होगी ।

Kalpanaayen

और बहुत सी जगहों पर तो महिलाओं को दूर दूर से पानी लाना पड़ता है, अच्छी बरसात होने से गांव के कुँए तालाब भरे रहेंगे तो उनको भी थोडा आराम मिल जाएगा । जानवरों के लिए भी भरपूर चारा होगा, वे प्यास के मारे तड़फेगे नहीं । ये कल्पनायें जब सच होंगी तो उस वक्त दिल को मिलने वाले आनंद के बारे में कल्पना करके ही मन अभी से प्रफुल्लित हो रहा है ।

कल्पनाओं की उड़ान वैसे है बड़ी कमाल की । दिमाग में आने वाले अनगिनत विचार या सोच का ही दूसरा नाम कल्पना है । भविष्य में घटने वाली घटनाओं को हम कल्पनाओं के माध्यम से बहुत पहले ही मन ही मन देख लेते हैं । अच्छा बुरा जो देखना चाहो कल्पनाओं के समंदर में डूब जाओ और देख लो ।

Imaginations / thoughts

वैसे ज्यादातर लोग सकारात्मक कल्पनायें ही करते हैं जिनका परिणाम वे येन केन प्रकारेण कल्पना करते हुए अपने पक्ष में ले आते हैं ।  शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो कल्पनाओं के जहाज पर सफ़र ना करता हो ।



ये मजेदार तब हो जाती है जब पांच सात जने फुरसत से बैठे गप्पें लड़ा रहे हो और ऐसा कोई विषय छिड़ जाए जिसका कोई सिर पैर ही ना हो, और बहुधा ऐसा ही होता है । ना जाने कितने लोगों ने ये कल्पना की होगी कि अमेरिका अगर धरती पर भारत के ठीक निचे हैं तो क्यों ना एक खड्डा खोदा जाए जिसका दूसरा दरवाजा सीधा अमेरिका में ही खुले ।

Kalpanaayen

ऐसे विषय एक बार शुरू हो जाए तो फिर तो कल्पनाओं की रॉकेट जो उड़ती है तो बिना कहीं रुके पता नहीं कहां कहां का सफ़र कर आती है । हां इस बीच ठहाकों से आसमान जरूर गूंज उठता है ।

हम अगर कोई कार्यक्रम भी बनाते हैं तो उसमें भी कल्पनाओं का दखल जगह जगह होता है । उदाहरणार्थ यदि हमें रेलगाड़ी से किसी लंबी यात्रा पर जाना हो तो गाड़ी के डब्बे की सीट के बारे में हम कल्पना करने लगते हैं की वो आरामदायक हो, टूटी हुई ना हो । कल्पनाओं में ही ये भी सोचने देखने लगते हैं कि उस कूपे में साथ में आने वाले अन्य यात्री कौन होंगे, उनके पास ना जाने कितना सामान होगा, चाय वाला चाय अच्छी लाएगा की नहीं, रास्ते में गाड़ी लेट तो नहीं होगी, इत्यादि इत्यादि ।

Imaginations / thoughts

कुछ स्वादिष्ट कल्पनायें भी हो जाती है जब आने वाले सप्ताहांत में किसी भोजन समारोह का निमंत्रण मिल जाए । फिर तो कल्पनाओं में ही मुंह में पसंदीदा खाद्य पकवानों का स्वाद घुलने लगता है, हां ये स्वाद इस बात पर निर्भर जरूर करता है कि आपकी कल्पना शक्ति कितनी सशक्त है । निमंत्रण मिलने के बाद ये डर भी बना रहता है कि किसी कारणवश ये कार्यक्रम रद्द ना हो जाए । ख़ुशी दुगुनी हो जाती है जब वो समारोह तयशुदा कार्यक्रमानुसार हो और उस दावत में वही या उससे उम्दा भोजन मिल जाए ।

कल्पनाओं में बहुत शक्ति होती है मित्रों । कल्पना करके ही बहुत से वैज्ञानिकों ने कितनी सारी इज़ाद कर डाली । क्योंकि कल्पनायें जब साकार रूप लेती है तो उनके नतीजे बहुत सुखद होते है ।



इसके अलावा बहुत सी मानसिक परेशानियां आप महज कल्पनाओं की नाव पर सवार होकर दूर कर सकते हैं । कोई भी नकारात्मक विचार अगर आपके मस्तिष्क में घर बनाये हुए है तो उसे सकारात्मक कल्पनाओं के हथियार से मार सकते है, करके देखिये ।

हमेशा जीत की कल्पना कीजिये । बाद में अगर दुर्भाग्यवश हार जाएं तो निराश होने की बजाय अगली बार जितने की कल्पना करना शुरू कर दीजिये, क्योंकि कोई भी हार आखरी हार नहीं होती ।

Kalpanaayen

अब मैं भी कल्पना कर रहा हूँ कि आपको मेरा ये ब्लॉग पसंद आएगा, इतना ज्यादा कि आपके द्वारा मिली तारीफों के लिए मुझे बहुत सी जगह बनानी होगी ।

जय हिन्द

*शिव शर्मा की कलम से***








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Wednesday, 22 June 2016

Ehsaas Tera - एहसास तेरा

Ehsaas Tera - एहसास तेरा


लाजवाब हुस्न उनका तारीफ़ के काबिल है,
लिख दूं दो लफ्ज भी तो बन जाती गज़ल है,

तन पाया सोने जैसा रेशम रेशम बाल है,
होंठ जैसे चमन में खिले खिले से कँवल है,

उस चेहरे के नूर से है रोशन हर सुबह मेरी,
रात युं लगे जैसे उन आँखों का काजल है,

बिजलीयां गिराती है हर अदाएं उनकी,
लहराता दुपट्टा लगे जैसे कोई बादल है,  
Ehsaas Tera - एहसास तेरा

शहद से मीठे है हर एक बोल उनके,
एहसास छूने का चांदनी सा शीतल है,

हँसे वो जब झूम उठती है फिजायें,
खुशबूयें बिखेरता हवा में वो आँचल है,
Ehsaas Tera - एहसास तेरा




खयालों में वही है ख़्वाबों में भी वो,
सुरत इन आँखों से पलभर भी ना ओझल है,

न चैन है दिन में "आभास" ना नींद है रातों में
हर घड़ी उनकी है अब, उन्ही का हर पल है ।।
Ehsaas Tera - एहसास तेरा
πππππππππππππππππππππππππ

*प्रदीप माने "आभास" की रचना*

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शिव शर्मा



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Thursday, 16 June 2016

Jeevan Ki Sugandh - जीवन की सुगंध

Jeevan Ki Sugandh - जीवन की सुगंध




जीवन की सुगंध
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मुश्किल से घबराना मत
खुशियों में इतराना मत,
आँखे कान खोल कर रखना
राह में ठोकर खाना मत,

जीवन है एक खेल अनोखा
कभी हार और कभी जीत है
अक्सर समझ नहीं आ पाता
कौन गैर है कौन मीत है
जिससे मिलो बस हंसकर मिलना
झूठी शान दिखाना मत
कड़वा बोल किसी के दिल को
चोट कभी पहुँचाना मत,
Jeevan Ki Sugandh

सफ़र है लंबा रस्ते टेढ़े
मित्र बनाते ही रहना
सुख दुःख सबसे चलो बांटते
राज मगर खुद तक रखना
बात जो निकली हुई पराई
बात भूल ये जाना मत
ईश्वर तेरे साथ हमेशा
साथ भूल ये जाना मत,

समय निरंतर चलता रहता
ज्यों सागर में लहर चले
कभी ना थमता कभी ना थकता
दिन के आठों पहर चले
कीमत इसकी सदा समझना
युं ही व्यर्थ गंवाना मत
जैसे समय बदलता रहता
तुम कहीं बदल ना जाना मत,

जीवन की सुगंध


प्रेम से सबके साथ रहें
तो जीवन में आनंद रहे
फूलों सा हो ह्रदय अगर तो
चारों और सुगंध रहे
या तो इबादत समझ के करना
या फिर प्यार जताना मत
जो दिल प्रेम से भरा लबालब
वो दिल कभी दुखाना मत,
Jeevan Ki Sugandh

दुनिया में लाचार बहुत है
मुफ़लिस और बीमार बहुत है
दर्द ही उनकी किस्मत है
वक्त की जिन पर मार बहुत है
गर बन सको तो बनो सहारा
लेकिन उन्हें सताना मत
दया धर्म करते ही रहना
इसमें कभी शरमाना मत,

मुश्किल से घबराना मत
खुशियों में इतराना मत ।।
जीवन की सुगंध


जय हिन्द

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*शिव शर्मा की कलम से***










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Sunday, 12 June 2016

Prem Rog

प्रेमरोग

नमस्कार मित्रों । आज एक हल्कीफुल्कि ग़ज़ल ले कर आया हुं, एक सुखद अंत वाली प्रेम कहानी पर आधारित। उम्मीद करता हुं आप इसे पसंद करेंगे और अपना स्नेहाशीष प्रदान करेंगे ।

प्रेमरोग
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पहली नज़र में दिल खो बैठे
प्रेम दीवाने हो गए,
उनकी मुस्कान की शमा जली
और हम परवाने हो गए,

खाते पीते उठते बैठते
चेहरा वही नजर आये,
एक दिन उनको ना देखें
युं लगे जमाने हो गए,

रात रात भर जगते रहते
नींद उड़ गयी आँखों से,
आज से पहले जो देखे
वो ख्वाब पुराने हो गए,

उनके ख्यालों में गुमसुम
फिरते रहते थे सड़कों पर,
गलियों की मिट्टी से भी
अपने याराने हो गए,

खोये खोये से रहते थे
हर पल उनकी यादों में,
दिल में हजारों हसरतों के
कई खजाने हो गए,


ध्यान काम से हटने लगा
खाना पीना भी भूल गए,
प्रेमरोग ने जो जकड़ा
खुद से बेगाने हो गए,

आँखों आँखों से अक्सर
हम बातें भी कर लेते थे,
मन ही मन में प्रेम के
कितने तानेबाने हो गए,

एक दिन हिम्मत करके उनसे
दिल की बातें कह डाली,
उनके मीठे बोल
हमारे लिए तराने हो गए,

मेहरबान थी किस्मत हम पर
चाहा जिन्हें वो हमें मिले,
ख्वाब हकीकत बने
हमारे दिन सुहाने हो गए ।।

जय हिन्द

*शिव शर्मा की कलम से***







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Thursday, 9 June 2016

Uff Yeh Garmi


*ऊफ़्फ़ ये गर्मी*

ऊफ़्फ़ ये गर्मी......, गर्मी के मौसम में ये वाक्य हमें बहुतायत में सुनने को मिल जाता है । जिसे देखो बदहवास और पसीने से तरबतर नजर आता है ।

गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा समस्या तब हो जाती है जब हमें पंखे से हटकर किसी काम के लिए घर से बाहर जाना पड़े । और गर्मी का आलम तो ये होता है कि दिन चढ़ा नहीं और सूर्यदेव अपने पूर्ण जोशोखरोश से पुरे वातावरण को तपा  देने को लालायित हो उठते हैं ।

ऐसे मौसम में हर कोई चाहता है कि वो दिनभर पंखे की हवा या वातानुकूलित कमरे में बैठा ठंडी ठंडाई या शरबत का लुत्फ़ उठाता रहे, मगर छोटा हो या बड़ा, काम तो सबको करना ही पड़ता है । काम करना भी जरुरी होता है । पापी पेट का सवाल जो है, भूख तो सर्दी गर्मी कुछ देखती नहीं है, अपने समय पर लग ही जाती है ।

मौसम चाहे सर्दी हो या गर्मी, हर बार हमें यूं लगता है कि इस बार पिछली बार से ज्यादा सर्दी या गर्मी है । विशेषतया गर्मी के मौसम में ।

ये बताने की आवश्यकता नहीं है कि हर मौसम का मिजाज अलग अलग होता है । ऐसे में हम कुछ बातों का ध्यान रखें तो हर मौसम का लुत्फ़ भी उठा सकते हैं और इन दिनों होने वाली मौसमी बीमारियों से भी बच सकते हैं ।

जैसे सर्दियों में हम प्रयास करते हैं की शरीर को किसी भी तरह गर्म रखें, वैसे ही गर्मियों में हमें प्रयास करना चाहिए की शरीर को गर्मी से बचाये रखें, खासतौर पर सूर्य की सीधी किरणें शरीर पर ना पड़े इसकी कोशिश करें ।

गर्मी की वजह से हमारा शरीर त्वचा को ठंडा रखने के उद्देश्य से पसीना छोड़ता है । जितनी ज्यादा गर्मी होगी उतना ज्यादा पसीना आएगा, सो समय समय पर पानी जरूर पीते रहें । इससे शरीर में पानी की कमी भी ना होगी और लू तथा गर्मी से भी बचाव होगा । हां ठन्डे पानी के लालच में फ्रिज में रखा हुआ ज्यादा ठंडा पानी ना पियें तो अच्छा है । मटके का पानी ठंडा भी होता है और स्वादिष्ट भी । कोशिश करें कि फ़्रिज के पानी की बजाय मटके का या सादा पानी ही ज्यादा पियें ।


अगर आप बाहर से आएं हैं, पसीने पसीने हो रहें हैं, तो जाहिर सी बात है प्यास भी जबरदस्त लगी होगी । लेकिन थोडा धैर्य रखें । कुछ देर आराम से बैठें । पंखे की हवा खाएं और जब पसीना सुख जाए एवं आप कुछ राहत महसूस करने लगे, तब ही पानी पियें, वर्ना वो पानी स्वास्थ्य को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है ।

बाहर से आते ही तुरंत नहाने भी ना घुसें । गर्म शरीर पर ठंडा पानी पड़ने से उसका उल्टा असर हो सकता है । आप सर्द गर्म की समस्या से पीड़ित हो सकते है और बाद में आपको बुखार भी अपनी गिरफ्त में ले सकती है ।

घर से निकलें तो छाता लेकर या सर और मुंह को ढकने की व्यवस्था करके निकलें, क्योंकि गर्मियों में हवा भी लू का रूप ले लेती है । साथ में पानी की बोतल जरूर रखें और गर्मी से परेशान होकर सड़कों किनारे मिलने वाले घटिया शीतल पेय पीने से बचें । शीतल पेय घर के ही विश्वसनीय होते हैं ।

ठंडी हवाओं के लालच में ए सी में ज्यादा देर तक बैठने का मोह ना करें, क्योंकि ये फौरी तौर पर आपको राहत जरूर दे देगा, लेकिन ये नुकसानदेह भी काफी है ।

अगले ब्लॉग में हम आपको बताएँगे की ज्यादा समय तक ए सी के संपर्क में रहने से क्या क्या नुकसान हो सकते हैं ।

आज बस इतना ही । अपना खयाल रखें । मस्त रहें, स्वस्थ रहें । हां वैसे इस बार लग तो रहा ही की तापमान पिछली बार से कुछ ज्यादा ही है ।

Click here to read "सेहत के शत्रु" by Sri Shiv Sharma


जय हिन्द

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Sunday, 5 June 2016

पंख (Pankh)

Image Source (http://www.gettyimages.in)

पंख  (Pankh)


नमस्कार दोस्तों । मुझसे आप परिचित तो हैं ही फिर भी एक बार और बतादूं । मैं प्रदीप माने, पेशे से इंजीनियर हूं और वर्तमान में नाइजीरिया की एक जानी मानी कंपनी में कार्यरत हूं ।

वैसे तो मैं मराठी में लिखता हूं, परंतु आप जैसे ही कुछ प्रिय मित्रों के सुझाव से हिंदी में लिखने का प्रयास भी कर रहा हुं । मेरी इसी मंच पर पूर्व प्रकाशित कुछ रचनाओं को आपका भरपूर स्नेह मिला जिस से उत्साहित हो कर मैंने ये ग़ज़ल "पंख" लिखने की कोशिश की है । यदि आपको ये रचना पसंद आये तो अपना स्नेहाशीष दें ।
(पंख)


ये एक कटु सत्य है कि बच्चे जब "बड़े" हो जाते है तो वो आजादी से उड़ने की सोचने लगते हैं, उनको अपने ही माता पिता और शुभचिंतक अपनी आजादी के दुश्मन दिखाई देने लगते हैं । इसी परिदृश्य को मद्देनजर रखकर कुछ शब्दों को जोड़कर एक माला बनाने का प्रयास किया है । आपके सुझावों और हौसला आफजाई की प्रतीक्षा करूँगा ।

पंख


पंख जो मिले तो वो उड़ने लगे घरौंदों से,
जहाँ ली थी छाँव भाग चले उन्ही पौधों से,

खता की थी जो सजाये महल मिट्टी के,
कब तक बचते सौदागरों के सौदों से,

देखे थे हजारों जो सोती जागती आँखों से,
सपने ही चुरा के ले गया कोई मेरी नींदों से,

(पंख)
Image Source (http://projectbeak.org/)

(पंख)

इस बार ना टपके छत मेरे आशियाने की,
मिन्नतें कर रहा है गरीब, बारिश की बूंदों से,

शायद अपनी ही गणित कुछ गलत थी,
हिसाब कैसे मिले बिगड़े हुए शहजादों से,

थोड़ी सी जो बची है जी लें किसी तरह,
कमजोरी झलक रही है टूटे हुए इरादों से,

क्यों तोहमत लगाऊं भला जमाने पर "आभास"
जब अपने ही मुकर जाते है किये हुए वादों से ।।
(पंख)

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पुनः आप सबको स्नेह भरा नमस्कार ।










--प्रदीप माने "आभास" की रचना

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शिव शर्मा



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