Monday, 26 September 2016

Aatank Ki Aag


आतंक की आ



एक बार फिर दहशतगर्दों ने माँ भारती के सीने को लहूलुहान कर दिया । कायरों ने कश्मीर के उरी में छिपकर हमला किया, हमारे 18 वीर जवान शहीद हो गए ।

वीर शहीदों को मैं नमन करता हुं । हम भारतवासी आपकी शहादत को कभी भुला नहीं पाएंगे ।

हम सब जानते हैं कि ये सब किसकी शह में हो रहा है । पिछले 70 वर्षों से इस नापाक पड़ौसी ने हमें सैंकड़ों जख्म दिए है, जिसकी धरती पर आतंक की फसल उगती है ।

इस नापाक पड़ौसी को कुछ हिदायतें एक कविता के माध्यम से देने की कोशिश कर रहा हुं ।







आतंक की आग

पर इतने भी ना फैलाया करो,
इशारों से समझ जाया करो,

सब्र का बाँध, टूट भी सकता है जनाब,
हद से ज्यादा, ना आजमाया करो,

ये मुल्क हमारा है और हम अमनपसंद,
यहां आतंक की आग ना जलाया करो,

किसी दिन हाथ जला बैठोगे अपने,
चिंगारियों को हवा ना लगाया करो,

अभी भी वक्त है, समझ जाओ,
कोई दवा समझ की भी खाया करो,

अपनी हालत का तुम्हें अंदाजा तो होगा,
बीमार हो, जोखिम ना उठाया करो,

खुलकर जीने दो उन्हें बचपन अपना,
नन्हे हाथों में बंदूकें ना थमाया करो,

ना दो बच्चों को तालीम वहशत की,
इंसानियत का सबक सिखाया करो,

क्या मिलता है तुम्हे मासूम खून बहाके,
कुछ खुदा का ख़ौफ़ भी खाया करो,

जब से जन्मे हो नफ़रतें ही तो की है,
कभी मुहब्बत से भी पेश आया करो,

वार करते हो हमेशा छुपकर पीछे से,
है हिम्मत तो सामने से आया करो,

जो भड़क गए तो चीर डालेंगे तुम्हें,
भारती के बेटों को मत सताया करो ।।

जय हिंद

*शिव शर्मा की कलम से***









आपको मेरी ये रचना कैसी लगी दोस्तों । मैं आपको भी आमंत्रित करता हुं कि अगर आपके पास भी कोई आपकी अपनी स्वरचित कहानी, कविता, ग़ज़ल या निजी अनुभवों पर आधारित रचनायें हो तो हमें भेजें । हम उसे हमारे इस पेज पर सहर्ष प्रकाशित करेंगे ।.  Email : onlineprds@gmail.com

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Saturday, 17 September 2016

Tere Liye - तेरे लिए

तेरे लिए


ओ मेरी अनजानी चाहत
मैं क्या तारीफ़ करूं तेरी,
लगती तुम चाँद का टुकड़ा हो
परियों जैसी सूरत तेरी,
जो मिले इजाज़त तो मन में
कुछ ख्वाब सजा लुं तेरे लिए,
दिल करता है नीलगगन से
चाँद चुरा लुं तेरे लिए,

सुंदरता की मूरत हो तुम
मेरे मन मस्तिष्क में छाई हो,
जो एक झलक देखी तेरी
इन आँखों में ही समाई हो,
आँखों में बसा कर रूप तेरा
कोई गीत बना लुं तेरे लिए,
दिल करता है नीलगगन से
चाँद चुरा लुं तेरे लिए,

चंचल चंचल आँखें तेरी
सूरत औरों से है न्यारी,
अधर गुलाब की पंखुड़ीयां
बोली कोयल सी है प्यारी,
सागर के थोड़े मोती चुन
इक हार बना दुं तेरे लिए,
दिल करता है नीलगगन से
चाँद चुरा लुं तेरे लिए,




तुम खिली चांदनी जैसी हो
शीतल निर्मल अंदाज तेरा,
आवाज तेरी सरगम जैसी
दीवाना है हर साज़ तेरा,
नायाब चुनिंदा गीत ग़ज़ल
दुनिया से छुपा लुं तेरे लिए,
दिल करता है नीलगगन से
चाँद चुरा लुं तेरे लिए,

श्रृंगार भी शरमा जाता है
जब तू दुल्हन सी सजती है,
नई राग कोई बन जाती जब
तेरी पायल छम छम बजती है,
पायल की मधुर धुन से कोई
संगीत सजा लुं तेरे लिए,
दिल करता है नीलगगन से
चाँद चुरा लुं तेरे लिए,

तुम्हें देख चाँद भी जल जाये
लगता है कोई परी हो तुम,
इस धरती की तो नहीं लगती
शायद नभ से उतरी हो तुम,
कोई नजर ना तुमको लग जाए,
ताबीज बना दुं तेरे लिए,
दिल करता है नीलगगन से
चाँद चुरा लुं तेरे लिए ।।

    **    **    **

Click here to read "इश्क दा रोग" Written by Sri Shiv Sharma

जय हिंद

*शिव शर्मा की कलम से***








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Thursday, 15 September 2016

Jo Bhi Hoga Achha Hoga

जो भी होगा अच्छा होगा


नमस्कार मित्रों । एक लंबे अंतराल के पश्चात् आपसे मुखातिब हो रहा हुं एक कविता लेकर ।

जीवन में अक्सर ऐसे दिन भी आ जाते हैं जब निराशा हमें घेर लेती है । हमें यूं लगने लगता है जैसे सब कुछ ख़त्म सा हो गया ।

परंतु इन क्षणों में हमें हार ना मानकर डटकर मुकाबला करना चाहिए परिस्तिथियों का । हम मनुष्य है । ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना । जिसे परवरदिगार ने बल और बुद्धि से नवाजा है । बस खुद पर भरोसा रख कर आगे बढ़ेंगे तो फिर जो भी होगा अच्छा होगा ।

कविता पसंद आये तो अपने विचारों से अवगत अवश्य कराएं ।

जो भी होगा अच्छा होगा


जारी अथक प्रयास रखो तो
जो भी होगा अच्छा होगा,
खुद पर तुम विश्वास रखो तो
जो भी होगा अच्छा होगा,

चलते रहता है जो निरंतर
एक दिन मंजिल पा जाता है,
एक एक कदम बढाकर कोई
एवरेस्ट भी चढ़ जाता है,
जज्बा यूं कुछ ख़ास रखो तो
जो भी होगा अच्छा होगा,
खुद पर तुम विश्वास रखो तो
जो भी होगा अच्छा होगा,

कुछ भी नहीं है मुश्किल
गर तुम दिल में अपने ठान लो
सब कुछ तेरे वश में होगा
खुद को अगर पहचान लो
कामयाबी की आस रखो तो
जो भी होगा अच्छा होगा,
खुद पर तुम विश्वास रखो तो
जो भी होगा अच्छा होगा,

वक्त बड़ी मनमानी करता
पल में बिगड़ता पल में संभलता
जकड़ के इसको वश में करले
तू चाहे तो सब कर सकता,
वक्त को जरा तराश रखो तो
जो भी होगा अच्छा होगा,
खुद पर तुम विश्वास रखो तो
जो भी होगा अच्छा होगा,

बस तेरे भले की खातिर जो
दिन रात दुआएं करते है,
तू छू ले शिखर तेरा नाम हो ऊँचा
यही कामना रखते हैं,
उन मात पिता को पास रखो तो
जो भी होगा अच्छा होगा ।।

         * * * *

जय हिंद

Click here to read "पहले तो तुम ऐसे ना थे" Written by Sri Shiv Sharma



*शिव शर्मा की कलम से***









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Thursday, 1 September 2016

Waqt to Lagta Hai


वक्त तो लगता है



समझने समझाने में, वक्त तो लगता है,
उलझनें सुलझाने में, वक्त तो लगता है,

क्या देर लगती है किसी के ख़फ़ा हो जाने में,
मगर रुठों को मनाने में, वक्त तो लगता है,

गुजर जाती है एक उम्र कुछ फर्ज निभाने में,
घर को घर बनाने में, वक्त तो लगता है,


वक्त तो लगता है



उनकी शिकायत है कि बड़ी देर से आये हो,
कुछ दूर से आने में, वक्त तो लगता है,





मुरझा जाते हैं चमन पतझड़ की मार से,
बहारों के लौट आने में, वक्त तो लगता है,

मुकद्दर के सिकंदर तो कुछ लोग ही होते है जनाब,
वर्ना कुछ कर दिखाने में, वक्त तो लगता है,

कुम्हला जाता है बदन, धुंधला जाती है नजरें,
जिंदगी को सजाने में, वक्त तो लगता है,


वक्त तो लगता है


बहुत से ख्वाब अक्सर बिखर के रह जाते हैं,
फिर नए सपने सजाने में, वक्त तो लगता है,




मुस्कुराकर चल देते हैं लोग फकत हाथ मिलाकर,
दिलों को मिलाने में, वक्त तो लगता है,

बिछड़ जाते हैं जो साथी दिलों में घर बनाके,
उनकी यादों को भुलाने में, वक्त तो लगता है,

दूरियां तो "शिव" कुछ ही पलों में बढ़ सकती है,
नजदीकियां बढ़ाने में, वक्त तो लगता है ।।


वक्त तो लगता है


      *    *    *    *

Click here to read "आ जाओ भैया" written by Sri Pradeep Mane


जय हिंद

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