Thursday, 4 May 2017

Napak Padosi - नापाक पड़ौसी



नापाक पड़ौसी


नमस्कार मित्रों । सर्वप्रथम तो मैं सुकमा और कृष्णा घाटी के हमलों में शहीद हुए वीर शहीदों को नमन करता हुं ।
युं तो पिछले 70 वर्षों से धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर के हालात किसी से छुपे नहीं है, जहां आये दिन हमारे सैनिकों पर  पत्थर बरसाए जाते हैं और पडौसी देश से आये आतंकवादी अक्सर हमले करते रहते हैं ।

इन घटनाओं को देख सुनकर दिल में एक टीस उठती रहती है, उस पर हाल ही में सुकमा और कृष्णा घाटी में घटी घटनाओं ने तो दिल को अंदर तक घायल कर दिया, बुरी तरह झकझोर कर रख दिया ।

अपने वीर सैनिकों के साथ हुई ये बर्बरता देख आज हर भारतीय दुखी और क्रोधित है । आखिर कब तक देश इन पीड़ादायक घटनाओं को सहता रहेगा । कहीं ना कहीं तो ये सब रोकना ही होगा । कुछ कड़े कदम उठाने ही होंगे ।

इसी तरह के बहुत से विचार जब मस्तिष्क में उथल पुथल मचाने लगे तो मैंने अपने विचारों को एक कविता नापाक पड़ौसी का रूप देकर आप सबसे साझा करने का सोचा और जो मन में था वो लिखता चला गया ।

यदि आपको लगे कि मेरे ये विचार आपके अपने विचारों से मेल खाते हैं तो मैं समझूंगा कि मेरा प्रयत्न सार्थक रहा ।




नापाक पड़ौसी


देखो उस गीदड़ ने फिर से
आज हमें ललकारा है
सरहद पार से आकर सीधे
गाल पे थप्पड़ मारा है

वहशीपन की हद करते इसे
लाज जरा ना आती है
दरिंदगी का दृश्य देख
मानवता भी शरमाती है

आखिर कब तक जालिम के
जुल्मों को सहते रहेंगे हम
दुम सीधी होने की कब तक
राहें तकते रहेंगे हम

आखिर कब तक चुप बैठे
बस निंदा करते रहेंगे हम
आखिर कब तक वीरों को
शर्मिंदा करते रहेंगे हम

कहीं पे नक्सल, कहीं पे पत्थर
किसी ने थप्पड़ मारी है,
आज वतन की अस्मिता पर
दहशतगर्दी भारी है,

धरती की जन्नत में भी
नफरत की फसलें उग रही है
केसर की क्यारी में नित
जेहादी नसलें उग रही है

भारत तेरे टुकड़े होंगे
जैसे नारे लगते हैं
अफजल और याकूब जिन्हें
निर्दोष बेचारे लगते हैं

गर ऐसे ही चलता रहा तो
एक दिन ऐसा आएगा
अदना सा कोई भी पडौसी
हमको आंख दिखायेगा

सवा अरब हो कर भी हम क्यों
सब कुछ सहते रहते हैं
बंद कमरों में बैठे केवल
निंदा करते रहते हैं


देश के रखवालों आखिर युं
कब तक ऐसा चलता रहेगा
सत्तर वर्ष से पीड़ा सहता
वतन हमारा जलता रहेगा

कहो आज तक क्या कुत्ते की
दुम सीधी हो पाई है
जिसके दिल में खोट भरी हो
उसे अक्ल कब आई है

लातों का है भूत उसे
बातों से क्या समझाओगे
पीठ में वो खंजर घोंपेगा
गर जो गले लगाओगे



उस कायर को पाठ पढ़ाओ
निंदा करना बंद करो
खा खा चांटे बार बार
शर्मिंदा करना बंद करो

 Karachi, Pakistanपलट वार हम कर सकते हैं
उसको ये समझाना होगा
दुष्टों को संहारने अर्जुन को
गांडीव उठाना होगा

दुश्मन का कलेजा थर्राये
ऐसी प्रचंड हुंकार भरो
बहुत हुई शांति की वार्ता
अब तो आर या पार करो

शक्ति का संधान करो अब
उसको सबक सिखादो तुम
हम क्या हैं क्या कर सकते हैं
पापी को दिखलादो तुम

आंखों में भर कर अंगारे
शेर की तरह दहाड़ो अब
चढ़ छाती पर दुश्मन की
वहां तिरंगा गाड़ो अब ।।

Click here to read "सात सुख" by Sri Shiv Sharma


जय हिंद

*शिव शर्मा की कलम से*










आपको मेरी ये रचना कैसी लगी दोस्तों । मैं आपको भी आमंत्रित करता हुं कि अगर आपके पास भी कोई आपकी अपनी स्वरचित कहानी, कविता, ग़ज़ल या निजी अनुभवों पर आधारित रचनायें हो तो हमें भेजें । हम उसे हमारे इस पेज पर सहर्ष प्रकाशित करेंगे ।.  Email : onlineprds@gmail.com

धन्यवाद

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4 comments:

  1. Bahut khoob .intjaar ha kuch mantriyo ke marne ka uske baad hi karyvahi hogi
    Bahut kutte ha ye neta

    Manoj matolia

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